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झील और गिलास कि कहानी best Motivational stories in hindi

दोस्तों मुझे उम्मीद है कि आप सभी अच्छे होंगे दोस्तों सुख दुख जीवन का एक हिस्सा है जो हर किसी इंसान की जिंदगी में आता है जब आपकी जिंदगी में दुख आता है तो आपको परेशान नहीं होना चाहिए हिम्मत नहीं आनी चाहिए यही बात समझाने के लिए मैं आपको एक motivational stories सुनाता हूं

एक बार एक नवयुवक किसी टीचर के पास गया तो वहां पर टीचर के पास जाकर उसने कहा कि मैं अपनी जिंदगी से बहुत परेशान हूं कृपया इस परेशानी से निकलने का कोई उपाय बताइए तो टीचर ने बोला कि पानी के गिलास में एक मुट्ठी नमक डाल दो और उसे भी जाओ तो युवक ने ऐसा ही किया तो टीचर ने उससे पुछा कि उसका स्वाद तुम्हें कैसा लगा तो उस युवक ने थूकते हुए कहा कि बहुत ही खराब है

और बहुत ही खारा तो टीचर मुस्कुराते हुए बोले कि एक बार फिर अपने हाथ से उतना ही नमक उठाओ मुट्ठी में बरकत जितना आपने उस क्लास में डाला है मेरे पीछे पीछे चलो तो दोनों धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी तो थोड़ी दूर जाकर पास में थी उन्होंने कहा कि इस नमक को इस झील में डाल दो तो युवक ने ऐसा ही किया फिर टीचर ने कहा कि इस झील का पानी पियो तो युवक पानी पीने लगा फिर टीचर ने एक बार फिर पूछा

कि बताओ तुम्हे इसका स्वाद कैसा लगा क्या अभी भी तुम्हे इसका स्वाद खारा लग रहा है उस युवक ने कहा नहीं यह तो बहुत ही मीठा है और बहुत अच्छा लग रहा है तो टीचर ने युवक को समझाया कि जीवन में दुख बिल्कुल नमक की तरह है न इसमें कम नहीं ज्यादा जीवन में दुख की मात्रा वही रहती है बिल्कुल वही लेकिन हम का स्वाद लेते हैं इस पर निर्भर करता है कि हम उसे किस पात्र में डाल रहे हैं

इसलिए जब तुम दुखी हो तो सिर्फ इतना कर सकते हो कि खुद को बड़ा कर लो गिलास मत बनो अब कुछ जेल की तरह बन जाना चाहिए और फिर वैसे ही होगा जैसे गिलास अगर आप की लाश बन गई तो आप को बुखार आ लगेगा जब उसमें आप नमक डालूंगी और अगर आप जेल बन गए और उसमें तो आपको मीठा लगेगा तो इसलिए जेल की तरह बन जाओ

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