Suvichar

Suvichar

जहाँ मूर्ख नहीं पूजे जाते, जहाँ अन्न की सुरक्षा की जाती है और जहाँ परिवार में कलह नहीं होती, वहाँ लक्ष्मी निवास करती है।

विद्या सफ़र में हमारा मित्र है. पत्नी घर पर मित्र है. औषधि रुग्ण व्यक्ति की मित्र है. मरते वक्त तो पुण्य कर्म ही मित्र है.

पहले स्वयं से पूछिए: सबसे बुरा क्या हो सकता है? फिर उसे स्वीकार करने के लिए तैयार रहिये.और उसके बाद उस बुरे को कम बुरा करने के लिए प्रयास करें ।

भीड़ में उन्हीं चेहरों को पहचाना जाता है, जिन्होंने अपनी पहचान बना ली है।

चरित्रहीन शिक्षा, मानवताविहीन विज्ञान ओर नैतिकता विहीन व्यापार खतरनाक होते हैं |

जिस प्रकार एक सूखे पेड़ को अगर आग लगा दी जाये तो वह पूरा जंगल जला देता है, उसी प्रकार एक पापी पुत्र पुरे परिवार को बर्वाद कर देता है.

मस्तिष्क के लिये अध्ययन की उतनी ही आवश्यकता है
जितनी शरीर के लिये व्यायाम की ।

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प्रकृति की अपेक्षा अध्ययन के द्वारा अधिक मनुष्य महान बने हैं |

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